हादसा

विमान को उड़ान भरे हुए 5 घंटे बीत चुके थे। पायलट ने घोषणा कर दी थी  कि विमान अब कुछ ही क्षणों में अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच जायेगा। इसके साथ ही सीट व गलियारे में यात्रियों की हलचल में भी तेजी आ गयी थी। यात्रियों ने इधर उधर अपने फैले सामान को समेटना प्रारम्भ कर दिया। अमूमन यही देखा है कि यात्रा को सुविधाजनक बनाने की गरज से यात्रीगण सहूलियत अनुसार वस्तुओं का  फैलाव कर लेते हैं।

विमान ने ज़मीन पर उतरने के लिए ऊंचाई में परिवर्तन किया और लगा कि वह काफी नीचे आ गया। कलेजा मुँह को आ गया। पैरों तले जमीन न होने का अहसास उस समय बड़ा खलता है। ऐसा लगता है जैसे भारहीन हो गए हों। स्तिथि अंतरिक्ष यात्रिओं की याद दिला देती है।

बहरहाल कुछ मिनट और बीत गए। महसूस हुआ कि इस बात को  भी काफी देर हो गयी। पर हम शायद वहीं के वहीं थे। कुछ पुख्ता पता नहीं चल पा रहा था। बाहर था सिर्फ असीम स्याह । जिसमे सदैव ही ऐसा लगता है जैसे आप एक ही जगह स्थिर हो। जिंदगी की तरह यात्राओं में भी सापेक्षता के सिद्धांत की महत्ता है। रेल , बस आदि की यात्रा में तुलना कर जान पाते हैं कि आप किस गति से आगे बढ़ रहे हैं या यूँ कहें कि देख पाते हैं कि खिड़की पार चीजें किस गति से पीछे छूट रहीं हैं। पर यहाँ इस सुविधा का अभाव ही रहता है।

सीट के सामने की स्क्रीन पर पॉइंटर से जहाज़ की स्थिति देखने पर पता चला हम पिछले दस मिनट से वहीँ अटके हुए थे । असमंजस की स्तिथि थी। कुछ समझ नहीं आ रहा था। इतने में क्रू की सदस्या लगभग दौड़ती हुई पास के गलियारे से निकल पायलट के केबिन की तरफ भागी। कुछ अंदेशा हुआ।

उसके तुरंत बाद ही पायलट ने पुनः उद्घोषणा की। “सभी यात्रीगणों से निवेदन है कि अब मैं जो कहने जा रहा हूँ कृपया उसे ध्यान से सुने। यह विमान संकट में फंस चुका है।  विमान में तकनिकी ख़राबी के कारण इसके पंखो ने काम करना बंद कर दिया है। हम एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल कक्ष के निरंतर संपर्क में हैं। मैंने और मेरे सह पायलट ने सारी संभव कोशिश कर ली है।  हमे आपत्काल लैंडिंग करनी होगी। पैराशूट का उपयोग भी हमारे लिए अब संभव नहीं क्योंकि हवाई अड्डे के आस पास पथरीली घाटियां हैं। हमे निकटतम समुद्र तक पहुंचना होगा। हालाँकि विमान में इसके लिए आवश्यक ईंधन नहीं है। हमारा प्रयास यही रहेगा कि हम इंजन को बंद करते हुए समुद्र पर लैंडिंग करें ताकि इसमें आग न लगे और हताहत होने की सम्भावना कम की जा सके। ईश्वर हम सब की सहायता करे। “

वाक्य समाप्त होने के साथ ही खून ने जैसे रगों में बहना बंद कर दिया हो। आस  पास की चिल्लाहटें काफी दूर महसूस हो रही थी। मैंने आँखे मूँद ली। शायद इससे अधिक मेरे बस में कुछ था ही नहीं।

जब होश आया तब अस्पताल में बताया गया कि पायलट शहादत के साथ सभी यात्रियों की जान बचाने में सफल हुआ।