स्वभाव के आधार पर हो व्यवसाय

जून/ जुलाई हमारे देश में परीक्षा परिणाम व स्कूल ,कालेजों में भर्ती के महीने हैं|अक्सर समाचार पत्रों में मेधावी छात्र छात्राओं के साक्षात्कारः ,जिसमें वे भविष्य में क्या बनेंगे/ बनना चाहतें हैं, छपतें हैं। करियर के प्रति जागरूक होना अच्छी बात है।किन्तु विषय विचारणीय तब बन जाता है जब विद्यार्थी बिना सोचे समझे किसी भी पेशे यथा प्रशासनिक सेवा, डाक्टर , इन्जीनियर , चार्टड अकाउंटेट-की दौड़ में शामिल हो जाते हैं।

पेशा अपने मूल स्वभाव के अनुरूप चुनना चाहिए ना कि” किसी और का सपना था “ या “ सभी यही चुन रहें हैं”- कहते हुए किसी भी पेशे में कूद जाना ।परिवार को भी बच्चे की प्रकृति के हिसाब से वृत्ति चुनने में मदद करनी चाहिए।

पहचान वालों में बच्ची की चित्रकला में असीम रूचि थी।रूचि ऐसी कि hostel की दीवारों पर पेंटिंग कर डाली। (वास्तव में यही जुनून है, जो किसी भी क्षेत्र में सफलता दिलाने के लिए आवश्यक है)पर परिवार को लगा इस पेशे में तो वह भूखों मर जाएगी। अत: उसे वकालत की ओर रवाना कर दिया गया। दूसरे प्रकरण में बच्ची शैफ बनने का शौक़ रखती थी किन्तु परिवार को सी ए अधिक उपयुक्त लगा। अकसर ऐसे ज़बरदस्ती के पेशे में बच्चे पिछड़ जाते हैं। कहा भी गया है कि जब आप मन का कर रहें हैं तब काम बोझ नहीं लगता। Choose a job you love, and you will never have to work a day in your life-Confucius।

विधार्थीगण/ उम्मीदवार के लिए उचित यही है कि व्यवसाय चुनने से पहले संभव हो तो पसंदीदा कार्यस्थल पर कुछ दिन सहयोगी बन कर अथवा पर्यवेक्षक बनकर रहें। (शायद इसी मूल भावना के साथ इंटर्नशिप की परिकल्पना की गई है।)उससे भी पूर्व विद्यार्थी अपनी प्रवृति को पहचाने- अगर आप स्वाभाविक रूप से शांत है तो प्रशासन आपके लिए क़तई नहीं है क्योंकि वहाँ आपको दैनिक कार्यों को निपटाने के लिए/ निर्णय लेने के लिए एक मज़बूत व्यक्तित्व चाहिए ।आप शांत/ अन्तरमुखी हैं तो कला में अपनी आजीविका खोजिए।जैसे संवेदनशीलता व क़लम एक बेहतर लेखक को जन्म देती है। मानव मशीनों के इर्द-गिर्द ही सम्पूर्ण जीवन नहीं जी सकता। कला भी जीवन में अमृत बूँद के समान है। मशीन/तकनीकी में कोई रूचि न हो तो इन्जीनियरिंग में प्रवेश मात्र मैथ्स अच्छी होने से ना लें। बहिर्मुखी हैं तो मार्केटिंग , व्यापार,अध्यापन अच्छे विकल्प हो सकते हैं। भ्रमजाल में ना फँसिये – कभी इंजीनियरिंग, कभी मैनेजमेंट ,कभी प्रशासनिक सेवा की तैयारी के इर्द-गिर्द ना घूमिए।एक चुनिए ठोस करिए। ताकि बाद में अफ़सोस ना रहे कि आपको सिर्फ़ परीक्षा देनी आती थी और आपने वह परीक्षा पास कर ली। नहीं पता था परीक्षा नहीं वरन दु:ख लिख रहें हैं।

दुनिया विशाल है और इसमें हर क्षेत्र की ज़रूरत है महत्ता है।एन आर नारायणमूर्ति,अमीश त्रिपाठी , आशुतोष राणा, तरला दलाल, संजीव कपूर,जयप्रकाश चौकसे, एन रघुरामन,अरणब गोस्वामी , रितु बेरी किसी परिचय के मोहताज नहीं है।हर क्षेत्र के अपने मायने है,कोई बेमानी नहीं। । अपने अंतस/ आप को टटोलिए।जब आप ज़िंदगी का सर्वश्रेष्ठ समय /घंटे / ऊर्जा दे रहें हैं, तो क्यों न प्रतिफल भी सर्वश्रेष्ठ हो।