मैडल

 कल शाम को माँ  ने फिर सोनू को संगीत  में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने पर डांटा था।

” पिछले एक साल से उसी लेवल पर अटके हुए हो। अन्नू को देखो  …..  कितना अच्छा कर रही है …… तुम्हारी ही क्लास  में  है   …….. लेवल ३ भी पास कर लिया है ”  पर माँ  उसको म्यूजिक पसंद है मुझे नहीं पसंद है। मैं भी तो कितना तेज दौड़ता हूँ उसको हरा देता हूँ। मुझे कोडिंग आती है उसको नहीं आती। ” …….. ” बस चुप करो  ……… मैं कोई बहाना सुनना नहीं चाहती  ……. इस बार की परीक्षा  में तुम्हे अगले लेवल में आना ही होगा  ……… वरना तुम्हारे सारे खेल बंद। ” सोनू चुप चाप अपने कमरे में चला गया। 

वह  संगीत की किताब व गिटार ले कर बैठ गया।  उसका मन संगीत में नहीं लग रहा था। पर माँ की डाँट के कारण कई देर  जबरदस्ती कोशिश करता रहा। कोई नोट नहीं लग रहा था।  उसे रोना आ गया।  सुबकते सुबकते वह वहीँ सो गया।

अगले दिन स्कूल जाते वक़्त उसने संगीत की नोट बुक और गिटार साथ में रखा। सोचा स्कूल में  समय मिलते ही अभ्यास करेगा।

पर स्कूल में जाने पर याद आया आज तो दौड़ का  “इण्टर स्कूल कॉम्पिटिशन” है। उसने पिछले महीने ही अपना नाम लिखा दिया था। अभ्यास भी रोज ही कर रहा था। कल रात माँ की डाँट से कुछ याद ही नहीं रहा। 

बहरहाल उसने अपना बस्ता और सामान कक्षा में रखा और मैदान की ओर  रुख किया।

मैदान में खिलाडी इकट्ठा होना शुरू नहीं हुए थे।  वह अभी कुछ देर और अभ्यास कर सकता था।

उसने अपने स्कूल के कोच द्वारा बताई गयी तकनीक अनुसार कुछ देर और प्रतियोगिता की तैयारी की। दौड़ स्कूल की अवधि में ही थी। अतः वह वापस घर भी समय पर ही पहुंच गया।  दिन भर की भाग दौड़ से थका वह आज जल्दी सो गया।

माँ को अचरज हुआ।  पर बोली कुछ नहीं।  कल रात का गुस्सा अभी बाकी था।

पर उससे रहा नहीं गया। कमरे में सोनू को सँभालने गयी। उसे गहरी नींद में देख कमरे से बाहर निकलने को हुई तो सोनू की टेबल पर कुछ चमचमाता दिखाई दिया। हाथ में लेकर देखा तो मैडल था – “सेकंड रनर अप इण्टर स्कूल कॉम्पिटिशन । “

कमरे से बाहर निकल कर वह देर तक सोचती रही  “सोनू ने बताया ही नहीं”। सारी  रात सुबह होने का इन्तजार करती रही। सवेरे  सोनू को उठते ही मैडल जीत की बधाई और न बताने की उलाहना दी  ” पर माँ आपको तो म्यूजिक पसंद हैं ना। ” उदास सोनू ने कहा।