मास्क

मास्क के आम जीवन में उपयोग से परिचय बरसों पहले  हांगकांग यात्रा  के दौरान  हुआ। राह  चलते इतने सारे लोगों को मास्क पहना देख बहुत आश्चर्य हुआ था।  पूछा  “यहाँ इतने लोगों को कैंसर होता है क्या ?”( पूर्व में देखे कुछ मुहँ के कैंसर  मरीजों  के कारण जेहन में यही  था कि कैंसर पीड़ित मास्क पहनते हैं, अन्य किसी रोगी को देखा ही नहीं था मास्क पहने हुए ) बताया गया – ”नहीं, यहाँ सामान्य  व्यवहार में दूसरों पर छींकना , खाँसना बहुत हेय दृष्टि से देखा जाता है। और subtropical जलवायु -नमीयुक्त इलाक़ा होने के कारण ज़ुखाम बहुत आम बीमारी है। अतः जिन्हे हल्का सा भी जुखाम ,खांसी का अंदेशा होता है मास्क पहन लेते हैं।“

इधर हमारे यहाँ  स्वास्थय कर्मियों के अलावा आज तक  किसी ने दैनंदिन में शायद ही मास्क बाँधा होगा।  अब जब रोजमर्रा में इसे पहनने की बारी आयी तो इतने  नायाब डिज़ाइन तैयार किये गए कि  किसी ने इस  पर हीरे जड़े तो किसी ने मधुबनी कला उकेरी।  इतना ही नहीं वरन इसे  बांधने के भी  इतने निराले  तरीक़े ईज़ाद कर लिए कि कहना ही क्या।

 मुँह  पर तरीके से मास्क  बांधता तो कोई बिरला ही दिखा है अन्यथा तो मुँह के अलावा ठोडी पर -यह सर्वप्रिय स्थल के रूप में अपनी पहचान बना पाया है।

दूसरा प्रिय स्थल है गले में  जैसे कह रहा हो

 ” बाँध लो न हमे अपने गले में , ताबीज़ की जगह

रह सकते हैं हम तो वहां भी एक भ्रम की तरह ” ***

अन्य जग़ह  –   कलाई के चारों ओर  – मंत्रित धागे के समान । कहीं कहीं मेज पर तिरस्कृत सा / उल्टा लेटा puppy सा।

कुछ और अलहदा तरीक़े नजर आये हैं -टोकने पर जेब में से जादूगर की तरह निकालते हुए। कई महाशय  तो अपनी मेज पर रखे कैलेंडर पर मास्क को टंगा कर ऐसा महसूस करते हैं जैसे पास में कछुआछाप अगरबत्ती रख ली हो।  या फ़िर देवी देवताओ की तस्वीर के ऊपर नाम  (कोरोना को) सार्थक करते हुए क्राउन की तरह लटकाये हुए। कहीं कान पर जैसे स्टेथेस्कोप हो। ….. कहने का तात्पर्य है जितने लोग उतने उपयोग। शायद इसी सोच के साथ कि कहीं भी किसी भी स्तिथि में लटके मास्क की उपस्तिथि भर से कोरोना उलटे पाँव दौड़ पड़ेगा।

शुक्र है अभी तक एक दूसरे का मांग कर मास्क  पहनने का चलन नहीं देखा गया वरना पुलिस के डंडे से बचने के लिए हेलमेट की तरह दूसरे का मांग कर पहनने से भी  यहाँ कोई गुरेज़ नहीं।

आने वाली पीढियां याद रखेगी हमे  मास्क के साथ किये गए नवाचारों के लिए।

***आभास