बादल

देख आसमां में बादल टुकड़ा
पूछूं आज मन में उमड़ा
भूले रास्ता या छूटा टोला
अथाह थार में भर के झोला
क्या कुछ बूंदे लाये हो
या फ़िर केवल कष्टों का
उपहास उड़ाने आये हो
कोसों चलती जल को पाने
खोद बेरी को बालू से
पाती रसातल भी रिसता
छिपाये कोई वेदना सा


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