तीस रुपए

आज की शुरुआत ही खराब थी।  सारी रात मच्छर खाते रहे , सुबह नींद खुली तब तक  सूरज सिर पर आ गया था । सब काम हड़बड़ी में  हो रहे थे। बबुआ के बापू के हाथ खाली टिकड़ा ही बाँध दिया।  साग ना बन सका था आज। ” पता नहीं कित्ते बजे वाली मोटर मिलेगी , कब शहर पहुंचेगा , कब मजदूरी  मिलेगी”   सोचते सोचते हाथ चूल्हे से चिपक गया।  चीख़ के साथ ही ध्यान लौटा।

काम निपटा भी न था कि पड़ोस का राजू हांफता हुआ आया –   “काकी …….. काकी……  ” .अरे आगे भी कुछ बोलेगा या काकी काकी ही करता रहेगा।  ” काका मोटर के नीचे आ गया …… शरीर ठंडा पड़ गया।  ” कुछ पूछ ही नहीं पायी…..सन्न रह गयी।  वह बोलता रहा………..    ” मोटर में भीड़ बहुत थी ,जैसे ही काका चढ़ा मोटर चल दी और भीड़ के धक्के से वह वापस बाहर गिर गया और पिछले चक्के के नीचे आ गया। ”  उसने लगभग झींझोड़ते हुए कहा ……. ” अब यहाँ खड़ी क्या कर रही है …… जल्दी चल …….. हाँ हाँ …… ”  बेसुध सी उसके पीछे पीछे हो ली।

भीड़ जमा थी। ……. खून बह  रहा था। …… भीड़ को चीरते हुए उसके पास पहुंचे।  ” पुलिस को बुलाओ …… गाडी के नंबर नोट किये क्या …. ”  भीड़ में से तरह तरह की आवाजे आ रही थी।  मैं सुन्न सी  लेकिन उसका  खून बहते देख न पायी।  विनती की  ” कोई अस्पताल पहुंचा दो ”  …… भीड़ छंट गयी।  ”  पुलिस केस है। …. कौन झंझटों  में पड़े”  …… कहती हुई। 

आंसुओं की धार के साथ जैसे तैसे लगभग उसे घसीट कर ले जाते हुए अस्पताल पहुंची।  सफ़ेद कपड़े पहने एक कर्मचारी से विनती की ….. ” इसे जल्दी से जल्दी डॉक्टर के पास पहुंचा दो  …. “

पर उसे कोई जल्दी न थी।…… इधर सांस अभी भी चल रही थी पर उसका शरीर नीला पड़ता जा रहा था।  सफ़ेद कपडे वाले ने हाथ से मसाला मुँह  में दबाते हुए कहा “तीस रूपए लगेंगे।” सकते में आ गयी…..मैं तो चूल्हे पर से ही राजू की चीख़ के पीछे भागी आयी थी। … घरवाले की रोज की कमाई से ही चूल्हा जलता था। …… और अब….  तीस रूपए कहाँ से लाऊँ ? …. पास पड़ोस से  कुछ मांगती तो भी …… पर इतना तो समय ही नहीं मिला ।  

“मेरे पास कुछ नहीं है भैया। …. कुछ नहीं। हाथ जोड़ती हूँ  इसे बचा लो। …. इसे डॉक्टर को दिखा दो।” पर वह टस से मस नहीं हुआ।… मैं रोती गिड़गिड़ाती  रही और वह मसाला  पीटता रहा।  ” कह दिया ना तीस रूपए लगेंगे। …. है तो बता नहीं तो पहुंचा दे खुद ही।  …. एक्सीडेंट का केस है पुलिस कार्यवाही  होगी पहले।…. “

इधर इसकी सांस उखड़ती दिखी ……….  आस पास बदहवास सी लोगो से पैसे मांगने लगी।  किसी ने पांच दिए , किसी ने दस।

…… तीस रूपए होते होते … हम दोनों हार गए। उसकी सांस और मैं।