चर्चा- ए-चाय

चाय शब्द के साथ एक मीठी महक दिमाग़ में तैर जाती है। चाहे प्याला मुँह तक गया हो या नहीं उसकी ख़ुशबू बिना पिए ही ख़ुशी का संचार कर देती है।  आम जीवन में कितना कुछ इससे जुड़ा है — कहावते –जो मित्रवत होते हैं वो चाय पीते हैं ,  फिल्मों के मजेदार डॉयलोग -दो दोस्त एक प्याले से चाय पीयेंगे (अंदाज अपना अपना ) इससे दोस्ती बढ़ती है (फ़िर चाहे मुद्दा जेब की इज़ाज़त ना मिलने का रहा हो ) , Ad  line वाह ताज़ !! ,   ऐतिहासिक घटनाये –बोस्टन टी पार्टी   आदि।

चाय के  इतने  प्रकार – नींबू की ,तुलसी की , अदरक की  , गुड़ की …. वग़ैरह वग़ैरह। हरी चाय कहना थोड़ा उलझाना हो सकता है ग्रीन टी को।

चाय की चुस्कियों से मिली ताज़गी शब्दों से परे है। अलग अलग समय पर इसकी आवश्यकता अनुसार  शीर्षक बदल जाता है  जैसे सुबह की चाय दिन की शुरुआत  के लिए , शाम की चाय  दिन भर की थकान दूर करने के लिए और इन दोनों के बीच में मिल जाये तो जलसा हो जाता है।

शायद स्वाद से अधिक भावनाएं जुडी हुई है। चाय के बुलावे में जो आत्मीयता है वह दावतों में भी नहीं। वहीँ  चाय की ट्रे में साथ जो भी रखा आता है उसकी अहमियत मल्टी नेशनल कंपनी की सब्सिडरी सी रह जाती है जैसे वालमार्ट के साथ कोई Mom & Pop Shop .

चाय पीने की शुरुआत तो खैर घर के बड़ो को देखकर हुई जो इसे समय गुजारने का एक मीठा सा जरिया मानते आये हैं। इससे परिचय  स्कूल के वार्षिकोत्स्व में सुने भूपेन हज़ारिका के गाने एक कली दो पत्तियां से गहराता गया।  फिर चाहे यह गोंग चा /  बबल टी ही क्यों न हो।

गोंग चा – इसके नाम ने मुझे आकर्षित किया और उसमे भी नाम के अंत  “चा ” ने। अपना सा लगा।  चाय जैसा सा। गोंग चा जब परोसी गयी तो समझ नहीं आया इसे ख़त्म कैसे किया जाये इतनी बड़ी सर्विंग कि पूरा संयुक्त परिवार संतुष्ट हो जाये। फिर उसमे बच्चों की कैंडी जेली जैसे कुछ हर्बल बबल जो दांतो के नीचे फिसलते रहे। ताईवानी शायद इस बात से  नाराज़ हो जाएं अगर उन्हें पता चले कि उनकी हर्बल टी की तुलना जंक फ़ूड से की जा रही है।

चाय के कप के साइज को देखकर लगता है कि इसे माहौल के  सुकून देने के प्रयास के अनुपात से जोड़ा गया है – होटल /रेस्त्रां में विशालकाय और ढाबों में आधा उंगल के बराबर। या कहें कि ठहराव के औसत ने कप के  आकार निर्धारण में अपनी भूमिका निभाई है।

लम्बा सफ़र तय करती है यह बागानों से लेकर रेलगाड़ी के प्लेटफार्म से होती हुई घरों तक -चाय गरम ।

एक चाय हो जाये।